दुनिया के बाजारों में ईमान ढूढता हूँ
स्वर खो गये वो सरगम वो तान ढूढता हूँ.....
जलकर जलाये जिसने चिराग हसरतो के
मुर्दा कफ़न में फिर वो मै जान ढूढता हूँ....
गाते थे जागरण के जो गीत सो गये है
मै फिर उसी जशन का अरमान ढूढता हूँ....
कागज पे जिसने लिखकर बदली वतन की सूरत
वो स्याही वो कलम के निगहबान ढूढता हूँ....
लिखना बड़ा जटिल है बिकना बहुत सरल है
बिकते नहीं कभी वो सामान ढूढता हूँ....
अब "धीर" उसूलो की बाते लगे यो जैसे
यादों के खंडरो में पहचान ढूढता हूँ......
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कटती गऊए तुम्हे पुकारे
गौवंश के हालातो पर गौ वंश की पुकार..... तर्ज़ : कस्मे वादे प्यार वफा सब कटती गऊए तुम्हे पुकारे श्याम सलौने आओ रे संकट में गौ वंश गोपाला आकर ...
-
वो मयखाने के पैमाने में सब खुशिया लुटा बैठा भरी मांगे,खनकती,चूडिया, बिंदिया लुटा बैठ...
-
कपकपाती ठंड मे उल्लास कैसा..? पश्चिमी नववर्ष का आभास कैसा..? पश्चिमी... दीन दुखिया सडक पर सिकुडे पडे हो जो ठिठुरती धुंध मे अकडे खडे हो....
No comments:
Post a Comment