नैनो की वीथियों में पीडाओ का तरल है
कागज के जिस्म पर ये स्याही नहीं गरल है
सिक्को से लेखनी का कद कैसे नापियेगा
लिखना बहुत कठिन है,बिकना बहुत सरल है.........
जमी बेच देंगे, गगन बेच देंगे
कलि बेच देंगे,सुमन बेच देंगे
कलम के सिपाही अगर सो गए तो
वतन के मुहाफ़िज़ वतन बेच देंगे.........
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वो मेढक कुएं है टर्रा रहे है
असर खानदानी, दिखा रहे है गधे शेर खुद को, बता रहे है जिन्हें पाला पोसा खिलाया निवाला औकात अपनी वो जता रहे है वहम के जो पर्दे पडे थे अक्ल पर ...
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वो मयखाने के पैमाने में सब खुशिया लुटा बैठा भरी मांगे,खनकती,चूडिया, बिंदिया लुटा बैठ...

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