चढ़ मंच पर हल्ला यो मचाना तो छोडिये
हद हो गई अपने को जताना तो छोडिये.....
जिसको बनाने में दफ़न लाखो है जिन्दगी
ऐसे मंका को अपना बनाना तो छोडिये...
जेवर बना सोने को गलाया जो ताप में
खुद को उन्ही जेवर से सजाना तो छोडिये...
दिल है मगर दिलदार का नामो निशां नहीं
अच्छा है यहाँ दिल को लगाना तो छोडिये....
बैठे है यहाँ भेडिये इंशा की खाल में
आते हो नजर खुद को छुपाना तो छोडिये..
अब कौन दलालों से बचायेगा कौम को
मिल जायेगा जवाब बहाना तो छोडिये...
हर शख्स शख्शियत की परीधि मै कैद है
आ जायेगा यकीन भुलाना तो छोडिये....
"धीर" बदल जाएगी तस्वीर वतन की
कपास को कानो से लगाना तो छोडिये....
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कटती गऊए तुम्हे पुकारे
गौवंश के हालातो पर गौ वंश की पुकार..... तर्ज़ : कस्मे वादे प्यार वफा सब कटती गऊए तुम्हे पुकारे श्याम सलौने आओ रे संकट में गौ वंश गोपाला आकर ...
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वो मयखाने के पैमाने में सब खुशिया लुटा बैठा भरी मांगे,खनकती,चूडिया, बिंदिया लुटा बैठ...
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कपकपाती ठंड मे उल्लास कैसा..? पश्चिमी नववर्ष का आभास कैसा..? पश्चिमी... दीन दुखिया सडक पर सिकुडे पडे हो जो ठिठुरती धुंध मे अकडे खडे हो....

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