वो हमें हम उन्हें आजमाते रहे
कशमकश जिन्दगी की बढ़ाते रहे........
कैसे आती नजर मुझको उसकी नजर
थे वो हुशियार ऐनक लगाते रहे...
था बहुत कुछ मगर मुफलिशी में जिए
खोटे सिक्के वो अपने चलाते रहे..........
मै उसूलो के जाले में उलझा रहा
दाव पर दाव वो भी लगाते रहे........
"धीर" हालात पर मुस्कुराये सदा
वो छुपाते रहे हम बताते रहे.........
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कटती गऊए तुम्हे पुकारे
गौवंश के हालातो पर गौ वंश की पुकार..... तर्ज़ : कस्मे वादे प्यार वफा सब कटती गऊए तुम्हे पुकारे श्याम सलौने आओ रे संकट में गौ वंश गोपाला आकर ...
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वो मयखाने के पैमाने में सब खुशिया लुटा बैठा भरी मांगे,खनकती,चूडिया, बिंदिया लुटा बैठ...
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कपकपाती ठंड मे उल्लास कैसा..? पश्चिमी नववर्ष का आभास कैसा..? पश्चिमी... दीन दुखिया सडक पर सिकुडे पडे हो जो ठिठुरती धुंध मे अकडे खडे हो....

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