चुनावी मौसम है गुब्बार निकलेगा
मसला यू आर पार निकलेगा
राज जो छुपाये थे अरसे से
अब वो खुलकर बाजार निकलेगा
तोहमते और गिला शिकवा भी
बेवफा खास यार निकलेगा
वजूद क्या तेरे एहसानों का
भाई होकर भी गद्दार निकलेगा
कौन अपना है "धीर" करलो पता
हर गली से जो वार निकलेगा
इससे अच्छा है की खामोश रहे
गधा घोडे सवार निकलेगा

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