गांव गली मे घूम रहे कुछ बगुले बने शहजादे से..
लगता है चुनाव शहर मे, हम शतरंज के प्यादे से..
कोरे वादे कोरी घोषणा जुमलेबाजी कोरी है..
जैसे ये तो खास बनेऔर हम है बिलकुल सादे से..
लाखों का खेला है जुआ, माल करोड़ों खाने को..
जीत गये गर ये चुनाव तो, होंगे साहेब जादे से..
भांड मे जाये अपने वादे, कौन किसी का होता है...
जिनके वोटो से हम जीते, अब लगते वो आधे से...
लोकतंत्र के खेल अनोखे, लोक नहीं बस तंत्र यहां..
धवल भेष मे धीर देखलो, काले कलंक इरादे से..
