मन की अभिव्यक्ती के सौपानों पर बोलों क्या लिखता ...
बदल गये हालात वतन के बोलों क्या लिखता ....
धीर ....
बदल गये हालात वतन के बोलों क्या लिखता ....
धीर ....
हाकिम है लाजवाब मगर चमचों से घिरे है.. इस दौरे चापलूसी मे दिन किसके फिरे है.. वो देखते उतना ही है जितना ये दिखाते.. वो मिलते है उनसे ही जिनस...