Monday, January 12, 2026

उत्कृष्ठ प्रकाशन से जारी मेरा तृतीय काव्य संग्रह...


 

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वो मेढक कुएं है टर्रा रहे है

 असर खानदानी, दिखा रहे है गधे शेर खुद को, बता रहे है जिन्हें पाला पोसा खिलाया निवाला औकात अपनी वो जता रहे है वहम के जो पर्दे पडे थे अक्ल पर ...