Wednesday, February 1, 2023

अभिमन्यु मारे जाते है...

*कुचक्र सदा घेरे रहते अपने ही घात लगाते है..*

*यहां चक्रव्यूह की रचना मे अभिमन्यु मारे जाते है..*

*नर महता के आगे अक्सर पंचाली पर ही दांव लगे..*

*यहां भरी सभा मे चीरहरण अक्सर स्वीकारे जाते है..*

*शर शैया लेटे भिष्म विवश गुरु द्रोण कुचक्र चलते हो..*

*वहां बर्बरीक से अदम्य वीर छल मे ही वारे जाते है..*

*जिद के आगे पंचाली के लाशों के ढेर लगे भारी..*

*छल, कपट, दम्भ से विवश वीर बेमौत संहारे जाते है..*

*है इन्द्रप्रस्थ सी मोहमाया लक्षाग्रह से षडयंत्र यहां..*

*अनुशासन सुचिता पे अक्सर अवसर भारी पड जाते है..*

*अंधे के अंधे होते है जहरीले शब्द  कटीले से..*

*मर्यादा खोते शब्द यहां महाभारत ही करवाते है..*

*अपने बैठे हो अपनों पर पल पल जो घात लगाने को..*

*पासों की चालों से शकुनि कौरव कुल को मरवाते है..*

*अज्ञात वाश से जीवन मेवअपनी पहचान छुपाले जो..*

*वो " धीर" श्रेष्ठ योद्धा जग मे इतिहास गिनाये जाते है..*


*धीरेन्द्र गुप्ता " धीर"*

9414333130

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