Thursday, December 29, 2016

मेरा ‌प्रथम ‌काव्य ‌संग्रह - ‌मेरे ‌गम ‌मेरी ‌खुशियां


2001 मे जारी भजन एलबम - बिगडी बना दो सांवरा


‌द्वितिय ‌काव्य ‌संग्रह:- ‌मेरी ‌मन ‌व्यथा


जीवन ‌कृति

‌जीवन के लम्बे अभिनय मे अनेकों किरदारों को निभाया। कभी गायन तो कभी साहित्य सृजन तो कभी पत्रकारिता जैसे चुनौती पूर्ण कार्य की कसौटी । हर बार ,हर रुप मे मुझे आपका सहयोग, आशीष, प्रेम सतत, अविरल मिलता रहा। आप सभी का आभार एवं मेरी कृति आपको समर्पित ।

Saturday, August 30, 2014

तर्ज़ :- कस्मे वादे प्यार वफ़ा
कटती गऊए तुम्हे पुकारे श्याम सलौने आओ रे
संकट में गौ वंश गोपाला आकर जान बचाओ रे
कटती ,,,,,,,,,
मूक हूँ मैं क्या बोलू तुमसे, तुम घट-घट के वाशी हो
मैं कटती हूँ हर घर कोने, चाहे अयोध्या कांशी हो 
है विस्वाश की सुन लोगे प्रभु, ना विस्वाश उठाओ रे
कटती ,,,,,,,,,,,
घुट - घुट कर सांसो में मेरा रुदन तड़फता रहता है
अपनों की दुत्कार से पीड़ित हृदय सिसकता रहता है
कब तक मौन रहोंगे कान्हा, अब ना देर लगाओ रे
कटती ,,,,,,,,,
गर्दन पर आरी से पहले, कितना मुझे सताते है
लाल रहे ये गोस्त हमारा, चमड़ी नरम बनाते है
पानी की हो गर्म बौछारें , ना इतना तड़फाओ रे
कटती ,,,,,,,,,,,
अब हृदय में,, धीर,, नहीं, गंभीर तुम्हे होना होगा
हिन्दू है गर खून से तो शमशीर तुम्हे होना होगा
गौ हत्यारों को बस फांसी ये कानून बनाओ रे
कटती ,,,,,,,,,
रचियता
धीरेन्द्र गुप्ता,, धीर,,
दिनांक 25 अगस्त 2014

गौ माता आशा छोड़ दो ,,,,,,,
हे गौ माता आश छोड़ दो अब जग के गोपालो से
उठो बचालो खुद अपने को इन जहरीले कालो से
हे गौ ,,,,,,,,,
बिक़े हुए अखबार भला क्या माँ तुझ पर लिख पायेंगे
जो सत्ता के मद में डूबे क्या कानून बनायेगे 
माता कहकर तुझे बेच दे उन मक्कार दलालो से
हे गौ ,,,,,,,
भगवा वस्त्र,धवल धोती अब तिलक दिखावा बना यहाँ
धर्म बना बस एक खिलौना, हुआ अँधेरा घना यहाँ
गौ शाला में धाक जमाये हत्यारे चण्डालो से
हे गौ ,,,,,,,,,
चंदो की जो चांदनी काटे छीन निवाले लाल तेरे
तेरे नाम से ऐश हज़ारो करते छदम दलाल तेरे
क़तलग़ाह से मिले हुए जो इन गद्दार हलालो से
हे गौ ,,,,,,
सत्य बड़ा कड़वा होता है हज़म कहा हो पाता है
इन गउओं का छीन निवाला गौ सेवक ही खाता है
गौ शाला में सौदा करते गौ सेवक नक्कालों से
हे गौ ,,,,,,,,
तेरे गुड और चारो तक का माँ सौदा हो जाता है
गौ शाला में जख्म हज़ारो, मरहम माँ खो जाता है
,,धीर, बचालो माँ अपने को इस जग के जंजालों से
हे गौ ,,,,,,,,,,,,

Photo: गौ माता आशा छोड़ दो ,,,,,,,
हे गौ माता आश छोड़ दो अब जग के गोपालो से 
उठो बचालो खुद अपने को इन जहरीले कालो से 
हे गौ ,,,,,,,,,
बिक़े हुए अखबार  भला क्या माँ तुझ पर लिख पायेंगे
जो सत्ता के मद में डूबे क्या कानून बनायेगे 
माता कहकर तुझे बेच दे उन मक्कार दलालो से 
हे गौ ,,,,,,,
भगवा वस्त्र,धवल धोती अब तिलक दिखावा बना यहाँ 
धर्म बना बस एक खिलौना, हुआ अँधेरा घना यहाँ 
गौ शाला में धाक जमाये हत्यारे चण्डालो से 
हे गौ ,,,,,,,,,
चंदो की जो चांदनी काटे छीन निवाले लाल तेरे 
तेरे नाम से ऐश हज़ारो करते छदम दलाल तेरे 
क़तलग़ाह से मिले हुए जो इन गद्दार हलालो से 
हे गौ ,,,,,,
सत्य बड़ा कड़वा होता है हज़म कहा हो पाता है 
इन गउओं का छीन निवाला गौ सेवक ही खाता है 
गौ शाला में सौदा करते गौ सेवक नक्कालों से 
हे गौ ,,,,,,,,
तेरे गुड और चारो तक का माँ सौदा हो जाता है 
गौ शाला में जख्म हज़ारो, मरहम माँ खो जाता है 
,,धीर, बचालो माँ अपने को इस जग के जंजालों से 
हे गौ ,,,,,,,,,,,,

Saturday, August 9, 2014

बाजार  सा लगे

हर बस्ती यहाँ मुझको एक बाजार सी लगे
हर शख्शियत यहाँ तो खरीददार सी लगे
मंडी है हसरतो की ये बिकता है हर सामान
लेंगे खरीद जिसकी भी दरकार सी लगे
सम्बन्ध बिक रहे है , बिक रहा ईमान भी
यारी बनावटी किसी फनकार सी लगे
बिकती सुहाग सेज़ और बिकता सिन्दूर भी
बिकते है जिस्म बोली बेसुमार सी लगे
बेटी, बहु, बहिन सब रिस्ते  बिके  यहाँ
जुए में दांव द्रोपदी हर बार सी लगे
अनमोल नहीं कुछ भी ,, धीर ,, मन का वहम  है
इज्जत भरे बाजार अब शिकार सी लगे